छत्तीसगढ़ जनगणना 2027 शुरू 1 मई से, डिजिटल सर्वे से हर घर तक पहुंच

Tue 14-Apr-2026,12:18 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ जनगणना 2027 शुरू 1 मई से, डिजिटल सर्वे से हर घर तक पहुंच Chhattisgarh-Census-2027-Digital-Survey
  • छत्तीसगढ़ में 1 मई से जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें घर-घर सर्वे कर मकान और परिवार से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी।

  • इस अभियान के लिए 62,500 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो राज्य के 33 जिलों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करेंगे।

Chhattisgarh / Raipur :

रायपुर/ छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। राज्य सरकार ने इस व्यापक प्रशासनिक अभियान के लिए विस्तृत रणनीति तैयार कर ली है। गृह विभाग की निगरानी में चलने वाला यह अभियान 1 मई से शुरू होगा, जिसमें पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और हाउसिंग गणना की जाएगी। सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में अधिकारियों ने इसकी विस्तृत जानकारी साझा की।

अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में 1 से 30 मई तक प्रगणक राज्यभर में घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस दौरान मकानों की स्थिति, निर्माण प्रकार, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं, परिवार की संरचना और उपलब्ध परिसंपत्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। यह चरण आगामी जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार करेगा।

इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए लगभग 62,500 अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसमें प्रमुख जनगणना अधिकारी, जिला और तहसील स्तर के अधिकारी, प्रगणक, पर्यवेक्षक और मास्टर ट्रेनर्स शामिल हैं। ये सभी टीमें राज्य के 33 जिलों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करेंगी।

इस बार जनगणना को डिजिटल स्वरूप दिया गया है, जो इसे अधिक पारदर्शी और सटीक बनाएगा। 16 से 30 अप्रैल तक नागरिकों को ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा दी जाएगी, जिससे वे स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। प्रत्येक परिवार को एक यूनिक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी दी जाएगी, जिसका सत्यापन प्रगणक द्वारा किया जाएगा।

राज्य सरकार ने माइक्रो प्लानिंग के तहत 33 जिले, 195 नगरीय निकाय, 252 तहसील, 19,978 गांव और लगभग 49,000 गणना ब्लॉकों में सर्वे की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार या घर सर्वे से छूट न जाए।

गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्रित सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह डेटा जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सुरक्षित रहेगा और केवल सरकारी योजनाओं तथा नीति निर्माण के लिए उपयोग किया जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना में जानकारी देना प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य है। इस अभियान को राज्य के विकास और योजनाओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।